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महावीर… महावीर स्वामी

Navkar-Mantraआज महावीर जयंती है… एक सवाल मन में चल रहा था सुबह से ही – एक व्यक्ति जो अहिंसा की बात करता है, जिसने कोई युद्ध नही लड़ा वो महावीर क्यों कहलाया?

पढ़ने बैठा तो ध्यान गया कि नमोकार को जैन परंपरा ने महामंत्र कहा है। नमोकार नमन का सूत्र है, यह पांच चरणों में है। समस्त जगत में जिन्होंने भी कुछ पाया है, जिन्होंने भी कुछ जाना है, जिन्होंने भी कुछ जीया है, जो जीवन के अंतर्तम गूढ़ रहस्य से परिचित हुए हैं, जिन्होंने मृत्यु पर विजय पाई है,जिन्होंने शरीर के पार कुछ पहचाना है- उन सबके प्रति नमस्कार… यहां नमन है पौरुष के प्रति।

महावीर का मार्ग तो साहस का है… एक छोटा बच्चा मां की उंगली छोड़ कर बीहड़, निर्जन मार्ग पर अकेला चल पड़े; आपदाओं, बाधाओं से जूझता हुआ, अंत में गंतव्य तक पहुंच जाए। महावीर ने समस्त सहारे तोड़ दिए, महावीर ने समस्त सहारों की धारणा तोड़ दी और व्यक्ति को पहली दफा उसकी परम गरिमा में और महिमा में स्थापित किया है। और यह मान लिया है कि व्यक्ति अपने ही भीतर इतना समर्थ है, इतना शक्तिवान है कि वो वीर से महावीर बन सकता है…।

पौरुष के अप्रतिम प्रतीक महावीर की अहिंसा में भी स्वनिर्भरता है, निर्भीकता हैै। महावीर स्वामी के ‘अहिंसा परमो धर्मः’ सूत्र के मूल रूप को समझने, आडम्बरपूर्ण पलायनवादी प्रवर्ति से बचने तथा अहिंसा शब्द को अपनी मानसिक कायरता की ढ़ाल न बनाने का राष्ट्रीय संकल्प ही श्री महावीर स्वामी जी के प्रति सच्चा भक्तिभाव हो सकता है।

शुभकामनायें!

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